क्या बिहार में नितीश युग का अंत अब बिहार में कमल का दौर शुरू

Mar 6, 2026 - 15:10
 0  4
क्या बिहार में नितीश युग का अंत अब बिहार में कमल का दौर शुरू

राज्यसभा में नीतीश, बिहार में बीजेपी के नए मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया। दो दशक से अधिक समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। उन्होंने गुरुवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल किए, जिससे उनके राज्यसभा जाने को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों को आधिकारिक तौर पर पुष्टि मिल गई।पिछले कई दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा थी कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में कदम रखने वाले हैं। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि उनका निर्णय चुनाव के दौरान पहले से तय था। नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा में जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद बिहार की जनता के साथ उनके संबंध पहले की तरह मजबूत और गहरे बने रहेंगे।यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि यह निर्णय बिहार चुनाव के समय ही तय किया गया था। हमारे संवादाता से बातचीत में उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान ही यह योजना बनाई गई थी कि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे और बिहार में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बीजेपी के किसी नेता को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि नीतीश कुमार के बेटे को भी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। इसके लिए उन्हें या तो जेडीयू के कोटे से डिप्टी सीएम बनाया जाएगा या फिर बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद मिलेगा।


ओमप्रकाश राजभर ने जनता के मत और जनादेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता ने पांच साल के लिए सरकार चुनी है और पांच साल तक यह सरकार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में नया मुख्यमंत्री जनता के कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूरे देश में बीजेपी अपनी नीतियों और कामकाज के कारण पहचान बना रही है और विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बैठाकर सरकार चला रही है। ऐसे में बिहार में भी यह बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।हालांकि, नीतीश कुमार के इस फैसले को उनके कुछ समर्थकों ने नकारात्मक रूप में देखा है। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में जेडीयू कार्यकर्ता पटना में नीतीश कुमार के आवास के बाहर जमा हुए और जोर देकर मांग की कि नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि राज्यसभा जाने का यह निर्णय जनता के जनादेश का अपमान है और इसे दो दशक से अधिक समय तक बिहार की सेवा करने वाले मुख्यमंत्री की इच्छाओं के खिलाफ माना जा सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की राजनीति में नया संतुलन पैदा होगा। अब राज्य में मुख्यमंत्री पद बीजेपी के किसी नेता के पास जाएगा, जबकि जेडीयू केंद्र की राजनीति में सक्रिय होकर अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ नई रणनीतियों पर काम करेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, और यह आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा कि बिहार में कौन नेतृत्व संभालेगा।इस बदलाव के राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव को लेकर जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक साजिश और गठबंधन की रणनीति मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे लोकतंत्र और राजनीतिक विकास की प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति में इस निर्णय के प्रभाव स्पष्ट होंगे और जनता के दृष्टिकोण के अनुसार नए मुख्यमंत्री की स्वीकार्यता तय होगी

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0