लोकसभा में चीन मुद्दे पर गरमाई बहस, राहुल गांधी को अखिलेश यादव का मिला समर्थन
संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय माहौल गरमा गया, जब नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चीन से जुड़े मुद्दे को चर्चा के दौरान उठाया। राहुल गांधी के सवालों पर सत्ता पक्ष की ओर से तीखी आपत्ति जताई गई, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा और हंगामा शुरू हो गया।
राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान भारत-चीन सीमा से जुड़े हालात का जिक्र करते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है और सरकार इस पर क्या कदम उठा रही है। जैसे ही उन्होंने इस विषय पर अपनी बात आगे बढ़ानी चाही, सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
हंगामे के बीच अखिलेश यादव का हस्तक्षेप
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में सामने आए। अखिलेश यादव ने कहा कि संसद चर्चा का मंच है और विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
अखिलेश यादव ने अध्यक्ष से मांग की कि राहुल गांधी को पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) का बयान पढ़ने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि यह बयान देश की सुरक्षा और चीन से जुड़े हालात को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे सदन के रिकॉर्ड में जाना चाहिए।
सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति
अखिलेश यादव की मांग पर भी सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और कहा कि सेना के पूर्व अधिकारियों के बयानों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना उचित नहीं है। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
इसके जवाब में विपक्षी दलों ने कहा कि जब सवाल देश की सीमाओं और संप्रभुता का हो, तब संसद में खुली और पारदर्शी चर्चा जरूरी है। विपक्ष का आरोप था कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
राहुल गांधी का सरकार पर निशाना
हंगामे के बीच राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि देश के सामने सच्चाई रखना है। उन्होंने दोहराया कि चीन के मुद्दे पर सरकार को साफ और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
हालांकि, लगातार हंगामे के कारण राहुल गांधी अपनी बात पूरी नहीं रख सके और सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित रही।
विपक्ष एकजुट, सरकार पर दबाव
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि चीन का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बनने वाला है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट नजर आए, जबकि सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ता दिख रहा है।
बजट सत्र के दौरान यह टकराव न केवल सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद कितने गहरे हैं।
फिलहाल, लोकसभा में यह मामला शांत नहीं हुआ है और आने वाले सत्रों में इस पर और तीखी बहस होने के आसार हैं।
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