इटावा के DM ऑफिस पहुंच गए शिवपाल यादव चुनावी सरगर्मी के बीच बवाल

Feb 5, 2026 - 13:49
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इटावा के DM ऑफिस पहुंच गए शिवपाल यादव चुनावी सरगर्मी के बीच  बवाल

2027 का चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे प्रदेश की राजनीति का पारा भी चढ़ता जा रहा है। हर राजनीतिक दल अपनी ज़मीन मज़बूत करने में जुटा है और इसी सियासी खींचतान के बीच इटावा में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए और प्रशासन को कड़ी चेतावनी दे डाली।

इटावा में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव अचानक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के सामने तीखा रुख अपनाया। मुद्दा था—बीएलओ के साथ कथित मारपीट और मतदाता सूची में गड़बड़ी का गंभीर आरोप, जिसने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए।

शिवपाल यादव के साथ बीएलओ अश्विनी कुमार भी मौजूद रहे, जिन्होंने प्रशासन को अपनी आपबीती बताई। अश्विनी कुमार का आरोप है कि भाजपा के मंडल अध्यक्ष ध्रुव कठेरिया और उनके समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की, जूता मारा और जबरन ‘फॉर्म 7’ पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की गई, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें।

इस मामले को लेकर शिवपाल यादव ने सत्ता पक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ और बीएलए को डराया-धमकाया जा रहा है, ताकि चुनिंदा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाए जा सकें और मतदाता सूची में हेरफेर की जा सके। शिवपाल यादव ने साफ शब्दों में कहा कि वे धरने के इरादे से ही कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और अगर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वे यहीं आंदोलन शुरू करेंगे।

डीएम और एसएसपी से लंबी बातचीत के दौरान शिवपाल यादव ने सरकारी काम में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं, इटावा के जिलाधिकारी सुभ्रांत कुमार शुक्ल ने पूरे मामले की जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि बीएलओ के साथ मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के तहत ही पूरी की जाएगी।

कलेक्ट्रेट परिसर में हुई इस राजनीतिक गहमा-गहमी ने साफ कर दिया है कि जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्माएगा, प्रशासन की निष्पक्षता और सख्ती ही हालात को संभालने की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

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